राजस्थान में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया हटा दिए गए है। पूनिया की जगह बीजेपी सांसद सीपी जोशी को राजस्थान की कमान सौंपी है। पार्टी आलाकमान जेपी नड्डा के निर्णय से जाट नाराज हो सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव से पहले पार्टी को जाटों की नाराजगी भारी पड़ सकती है। पूनिया जाट समुदाय से आते है। ऐसे में जाटों की नाराजगी भारी पड़ सकती है। बता दें राजस्थान में ओबीसी समुदाय का बड़ा वोट बैंक है। राज्य में ओबीसी कैटेगरी में लगभग 91 जातियां आती हैं जो राज्य के कुल मतदाताओं का लगभग 52 प्रतिशत वोट बैंक बनाती हैं। सतीश पूनिया स्वयं ओबीसी जाट समुदाय से आते हैं। राजनीति विश्लेषकों का मानना है कि उन्हें हटाने से ओबीसी समुदाय के बीच एक नकारात्मक संदेश जा सकता है। जिसका खतरा पार्टी को चुनावी साल में उठाना पड़ सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उनका कार्यकाल भी बेहतर रहा है। सतीश पूनिया के नेतृत्व में भाजपा ने कई राजनीतिक कार्यक्रम चलाए जो काफी सफल रहे। इस समय भी प्रदेश के हर जिलों में जन आक्रोश यात्रा निकाली जा रही है। यात्रा में कांग्रेस की सरकार होने के बाद भी इस यात्रा में हर समुदाय के लोगों की भागीदारी होने से भाजपा मजबूत होती दिख रही है। वसुंधरा राजे सिंधिया जैसे कद्दावर नेताओं के होने के बाद भी पार्टी के अंदर गुटबंदी न होने देने को उनकी बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा था। लेकिन अचानक पूनिया को हटाने से यह तय माना जा रहा है कि पार्टी में गुटबाजी चरम पर है। वसुंधरा कैंप को पूनिया की विदाई की वजह माना जा रहा है।
राजस्थान में कांग्रेस-भाजपा जाटों पर दांव खेलती रही है। बीजेपी ने सतीश पूनिया और कांग्रेस गोविंद सिंह डोटासरा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। प्रदेश की राजनीति में जाटों का महत्व कितना है, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है। बीजेपी ने पूनिया का हटा दिया है। बीजेपी ने सीपी जोशी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर ब्राह्मण वोट बैंक पर दांव खेला है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राजस्थान में ब्राह्मण बीजेपी का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है। ऐसे में रणनीति के तहत बीजेपी ने वोट बैंक को मजबूत करने के लिए यह दांव खेला है। राजस्थान के सियासी गणित में जाट वोट अहम है। वैसे जाट वोटर 12 से 14 फीसदी ही हैं, लेकिन इनके वोट एकमुश्त पड़ते हैं। राजस्थान में झुंझनू, नागौर, सीकर, भरतपुर और जोधपुर को जाट बेल्ट कहा जाता है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का सबसे ज्यादा फोकस इन्हीं जाट मतदाताओं पर है।

