राजस्थान में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव से कुछ ही महीनों पहले अगर दो अलग-अलग पार्टी के नेता आपस में भेंट-मुलाकात करें तो इसके कई सियासी मायने निकाले जाने लगते हैं। कुछ ऐसी ही तस्वीर आज राजधानी दिल्ली में देखने को मिली। AAP के सबसे बड़े नेता और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) चीफ हनुमान बेनीवाल ने आज एक-दूसरे से एक प्रोग्राम में मुलाकात की।
गठबंधन की चाहत
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजस्थान में होने जा रहे चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी। ऐसे में दिल्ली और पंजाब में सरकार बना चुके केजरीवाल यह चाहते हैं कि राजस्थान में भी AAP की सरकार बने। ऐसे में केजरीवाल अगर RLP के साथ गठबंधन करते हैं तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। गठबंधन की चाहत हनुमान बेनीवाल को भी है। केजरीवाल की लोकप्रियता और हनुमान के मजबूत आधार के सहारे राज्य में चुनावी मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। हालांकि AAP और RLP की तरफ से गठबंधन को लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
ताकि 2018 जैसा हाल न हो
साल 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में केजरीवाल की पार्टी ने 143 सीटों पर चुनाव लड़ा था। चुनाव के नतीजों ने AAP सुप्रीमो को हैरान कर दिया था। चुनाव में AAP को नोटा (NOTA) से भी कम वोट मिले थे। कुल वोटरों में से 1 फीसदी वोटरों ने भी केजरीवाल पर भरोसा नहीं जताया। वहीं राज्य में हनुमान की पार्टी RLP को लगभग ढाई फीसदी वोट मिले थे। विधानसभा में RLP के तीन विधायक हैं। वहीं हनुमान बेनीवाल नागौर से सांसद हैं। राजस्थान के जिला परिषद और पंचायती राज्य चुनावों में भी RLP ने शानदार प्रदर्शन किया। ऐसे में RLP के साथ हाथ मिलाने के बाद राजस्थान में AAP की स्थिति मजबूत हो सकती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोनों दल के नेता एक साथ चुनाव लड़ते हैं।

