– जीत का मिलता है आशीर्वाद, सच्चे मन से परिक्रमा करने पर हर मनोकामना होती हैं पूरी
नारद भोपालगढ़। राजस्थान प्रदेश के जोधपुर जिले के भोपालगढ़ तहसील में कुम्भारा गांव बसा हुआ है। इस गांव में भरथरी वैराग पंथ के जुगती नाथ महाराज का धुना आया हुआ है। झुकतीनाथ महाराज ने अपनी तपस्या से राजस्थान प्रदेश के साथ ही पंजाब, हरियाणा व उत्तर प्रदेश में भी अपने सैकड़ो श्रद्धालु बनाये है। जुगतिनाथ महाराज द्वारा स्थापित धुना हर सोमवार शाम को चेतन होता है। मंगलवार शाम तक हवन चलता रहता है। इस धुना में पीपल की लकड़ी, नारियल, अगरबत्ती व शुद्ध घी का हवन हर सप्ताह सोमवार व मंगलवार को होता है।धुना के अंदर रोट का भी हवन होता है।जिसकी खुशबू धुना के बाहर नहीं आती है ।रोट कपडे में लिपटा हुआ होता हैं।फिर भी खुशबू नहीं आती है । धुना में हजारों मन लकड़ी व नारियल का हवन किया गया फिर भी भभूति(राख )केसर नहीं बढ़ती है ,यथा स्थिति रहती है।कुमाहरा धुने की अलग ही पहचान है।कोई भी श्रद्धालु सच्चे मन से सात परिक्रमा करता है उसकी हर मनोकामना पूरी होती हैं।
संतान प्राप्ति की कामना
यहां पर मुख्यतः संतान प्राप्ति के लिए क्षेत्र सहित नागौर जिले व राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश से श्रद्धालु आते हैं। यहां मान्यता है कि लगातार सात मंगलवार तक धुना की परिक्रमा करने से उसे सभी प्रकार के दुखों से छुटकारा मिलकर उन्हें सुख की प्राप्ति होती है और संतान की प्राप्ति होती हैं। महंत बुद्ध नाथ महाराज बताते है कि राजस्थान के दिग्गज नेता परसराम मदेरणा के राजनीतिक गुरु जुगतिनाथ महाराज थे। महंत बुद्ध नाथ महाराज के अनुसार झुगतिनाथ महाराज कांग्रेस के दिग्गज नेता व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष रहे स्वर्गीय परसराम मदेरणा के राजनीतिक गुरु माने जाते हैं। 1984 के विधानसभा चुनाव में परसराम मदेरणा ने अपने गुरु जुगतिनाथ महाराज के हुक्म का पालन नहीं करते हुए विधानसभा का चुनाव लड़ा था ।महाराज ने मदेरणा के सामने प्रत्याशी उतारे नारायण राम बेड़ा को पहले आशीर्वाद दे दिया था। ऐसे में महाराज ने मदेरणा के चुनाव लड़ने के हठ करने पर कहा कि आप राजा नहीं तो मैं जोगी नहीं। अर्थात आप राजनीति में नही जीतोगे तो मैं अपना शरीर त्याग कर दूंगा। चुनाव का परिणाम 7 मार्च 1985 को होली के रामा श्याम के दिन प्रात 8:00 बजे बीबीसी लंदन रेडियो पर परसराम मदेरणा के पिछड़ जाने के समाचार सुनते ही जुगतिनाथ महाराज ने अपना आसन छोड़कर देवलोक गमन कर लिया। समाधि के समय अपने राजनीतिक गुरु जुगतिनाथ महाराज के अंतिम दर्शन करने मदेरणा सपत्नी आए थे।इसके साथ ही धुने पर वार्ड पंच से लेकर सांसद,विधायक, चेयरमैन चुनाव प्रचार शुरू करने से पहले धुने की केशर और आशीर्वाद लेकर ही अपना प्रचार शुरू करते हैं।जिसको जीत का पहले आशीर्वाद मिलता है वो ही चुनाव में विजय होता है।

